मसनद लूटी जो शाहे फलक के बरगाह की
हाथो से दिल को थाम के ज़ैनब ने आह की
उल था कहा छिपे नही जाहे पनाह की
फरियाद हैं, दुहाई है शेर ए अलाह की
आका तुम्हारी अहल ए हरम लूटे जाते है
या शेर ए हक़ बचाव के हम लूटे जाते है
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मसनद लूटी जो शाहे फलक के बरगाह की
हाथो से दिल को थाम के ज़ैनब ने आह की
उल था कहा छिपे नही जाहे पनाह की
फरियाद हैं, दुहाई है शेर ए अलाह की
आका तुम्हारी अहल ए हरम लूटे जाते है
या शेर ए हक़ बचाव के हम लूटे जाते है